Category: गीत-नाद –


मैथिलि गीत –

केलहुं कतबो जतन तैयो धेलक नै दम ,

कनियो निर्लज्जा के नै एलई शर्म —-, !!

आब त अपनों मोन घिच – पिच करैया ..

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!!

कैहता किछ कियो लैगता बड आइन

ओकरा घर फेर हम पिबतौं नै पैन

आब त गढ़ियो स आत्मा जुराईया

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!!

नै जानी  दुनिया  नै जानी संसार

हमरा त धेलक जे अलगे बोखार

बुझी जहरों के अमृत पिबैया

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!!

बुझितुं जे छीन लेत कियो चोरी में

धरित्हूँ जियरा बंद क तिजोरी में

जेना हाथो -पैर आब नै सुझैया

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!!

पकरै छि मोन के जुन्ना लगाम स

ससरैया तैयो जे जियरा दालान स

देखि आत्मा  हमर खहरैया

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!!

केलहुं कतबो जतन तैयो धेलक नै दम ,

कनियो निर्लज्जा के नै एलई शर्म —-, !!

आब त अपनों मोन घिच – पिच करैया ..

सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!! ३

( नविन ठाकुर )

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(ई हमर गीत परम विद्वान कवी श्री जगदीश चन्द्र (अनिल जी ) के तर्ज पर लिखल अच्छी उम्मीद अछि जे अपने जरुर पसंद करब)

काका मारल गेला पाहिले कन्यादान में

सौराठ्क मैदान में ना………!! २
एला पहिल बरद ओ बेच
तैयो कम परलैन दहेज़ ! २
बेच परलैन …बेच परलैन, खेतो अप्पन सम्मान में
पाहिले कन्यादान में ना !
काका …………………….
दोसर बेटी केलइन विवाह
सुनीते मांग ओ भेला बताह !२
अबिते ..अबिते मूर्छित भ खसला नवका दालान में
दोसर कन्या दान में ना
काका ……………………
कहा मैथिल बेटी के बाप
किया अछि बेटी अभिशाप ! २
सब दिन …सब दिन जिबैछी घुट -घुट क अपमान में
बेटी कन्यादान में ना
काका ………………….
उठू मैथिल बेटी के बाप
बैस्ल्हून किया ऐना उदास ! २
एल्हूँ ….एल्हूँ हम नवतुरिया एही विरोध अभियान में
बिन दहेज़ सम्मान में ना
काका ब्याहु धिया आब
मोछ पकैर क शान में
सौराठक मैदान में ना ……………काका ब्याहु धिया …..!! ४

(नविन ठाकुर )

सुनीते बोली आन्ह्के इजोर भ गेलै……………(मुखरा )
एला पाहून हमर सौसे शोर भ गेलै ..एला पाहून हमर सौसे ……!२

कुचरैत छल कौवा आई -बड जोर सं………………(अंतरा )
एता जे कियो ई आस छल भोर सं……! २
देखते मुखड़ा ….
हो देखते मुखरा अंहक मोन बेभोर भ गेलै ….! २
एला पाहून हमर सौसे…………………..

अंगना दुएऐर निप, रखल्हूँ सकाले
तरुवा – तरकारी अछि सबटा तराले ! २
कने दही ला …हे हे …
कने दही ला किया अनघोल भ गेलै ……!२ …एला पाहून हमर ………

कनिया – पुत्रा सब हुल्की मारैया
टाटक दोग दक चुटकी मारैया ! २
किया जाईते …..
हो किया जाईते हमर मोन के चितचोर ल गेलै
एला पाहून हमर सौसे शोर भ गेलै ……

सुनीते बोली आन्ह्के इजोर भ गेलै……………(मुखरा )
एला पाहून हमर सौसे शोर भ गेलै ..एला पाहून हमर सौसे ……!
एला पाहून हमर सौसे शोर भ गेलै ……! ३

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अछि प्यास्ल मोन त पिबैत चैल जाऊ……..२
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !!२

मोनक बेगरता अछि , प्यासल अछि कंठ
घुट- घुट नै जिबू ऐना बनू नै चंठ ……..२
अछि ललसा जे मोनक कहैत चैल जाऊ !!२
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !!३

मन्ल्हूँ जे पिने हायब बहुतो जंहा के
प्यासल अछि मोन जे तैयो आन्हा के…….२
अछि प्रेमक ई धारा बहैत चैल जाऊ !!२
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !!३

ससरल ने कंठ स एहन कुन पिबैत छि
पिबते उतैर गेल , तेहन की पिबैत छि ……..२
लिय चस्का ई प्रेम के डूबैत चैल जाऊ !!२
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !!

अछि प्यास्ल मोन त पिबैत चैल जाऊ……..२
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !! ५

गीत –

किया जिनगी के आशा आँहा सँ केलहुं / ……………………(मुखरा)
अपन हृदय के कोना में अंहि के बसेलहूँ //
किया जिनगी केर …………………………….//

मोनक बाते मोने रही गेल , …………………………(अंतरा )
उपजल जे ललसा कोना मैर गेल //
कंठ अधीर भ सुखाल जाईया ~,
अपन अधरक जाम सँ वंचित केलहूँ /
किया जिनगी के …………………………….//

जन्लहूँ ने दोख जे हमरा सँ भेल ,
प्रेमके जं दोख बुझी हमरा सँ भेल //
प्रेमक परिभाषा बुझलिए ने कहियो ~
धनक बेगरता आन्हा प्रेम में सिखेल्हूँ /
किया जिनगी के …………………………….//

बैसते फुलवारी में याद पैर गेल
टिशक दू संझा सँ आँखी भैर गेल //
प्रानक बिना कोनो जिनगी भेलैया ~
आँहा देह के बिसैर हमर प्राण ल गेलहुँ /
किया जिनगी के …………………………….//

अपन हृदय के कोना में अंहि के बसेलहूँ //
किया जिनगी केर …………………………….////

(नविन ठाकुर )

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