Category: गद्द्य भाग –


फ़ुसक दालान चारक बरेरी सं निकलल बांस पर …..कौवा काँव-काँव करैत……! टाटक ओई पार सं कल चीकरैत ……..पैन फोफियात बालटिन में .!

एतेक दूर में लगैया एकै गो कल छाई कियो ने कियो भैर दिन ओई पर लटकले रहत……..!

दालान पर बैसल कोना में एगो चौकी पर ……..बुढ्बा ८०-८५ के उम्र लगभग ….जौर बाँट में सुइध -बुइध हरय्ल आभास नई कनेको शारीरक ! एखनो अई उम्र में एतेक कजाक प्रति तन्मयता !

निर्जीव जौर के दिस तकैत ऐना -जेना बच्चा के मा कोरा में खेल्बैत ……..जौर के रगैर का प्राण प्रतिस्ठा दैत ……..!

मुह पर वृधा अवस्था के झुर्री ……….मुदा आइन्ख में वाह चमक बचपन के लगन जेना खेला प्रति भूक प्यास बिसरल सबटा …!
निन स बेभोर भेल सुतल चारू टांग पसैर क कुकुर लग में …….म्न्ध्वन्ध में परल मालिक के आए भूक नई लग्लैया भुजी परैया ……जौर ख्र्रेला पर पर आधा पपनी खोइल क तकैत जे बिदा भेला त नई ………….!
बाबा नहा लिय ने भानस भ गेलै………भोजन नई करबैई ……………( धुल स लेर्हल धुपाल एगो नन्किरबा आयल अंगना सा सन्देश लक )
कत छल्हा भोर सा बाऊ ……..सौंसे देह में गर्दा लागल छ चल बालटिन लोटा नेने आब कल पर ..!

पोता के देख क जेना दुगुना जोस सं भैर गेला ……..यह त छैन जे सद्खैन पाछू -पाछू रहैत छैन ……..एगो बुढ के सहारा………. त कोना नई हेतैन !

एक भोरे जे दीनानाथ के हाथ जोईएर क बैसल जौर बनब लेल ………..एक टा चार त छराईये जेतैन कम सं कम ……..बेसिए !

है जाऊ ने न्हाऊ गने भूख प्यास नई लगैया …………..( लिया आब बूरही के सेहो नई रहल गेलैन ,………… झ्झ्कारहो में प्रेम छैक …अंतर्मनक भासा छिएक ई मिथिला के )
जाई छि ने ……जन सब चार पर चेईढ़ जायत तखन जौर बनब लागब …………! कैलह सं दू गो जन रहत घर छार में …..!

नहा -सोना ……चानन तिलक केला ………आधा घंटा लैग गेलैन पूजा में ………!

भात दाईल ……आलू कोबी के तरकारी …….धथ्रिक चटनी …..आनंद आबिगेलैन खा क……….उठला हाथ धुव लेल त गोला कुकुर लेल करा लेब नई बिस्रालखिंन ….!

ओहो बेचारा बहुत देर सं बैसल -बैसल अंगना में हुनका उठक प्रतिक्षा में छला !……….नैन्ह्ये टा के रहै त आनने छथिन बाध सं उठा क तहिया स संगे नई कहियो छोरल्कैंन !

खा पि क दालान पर गेलैथ त चौकी पर नवतुरिया छौरा सब कब्ज़ा केने ………तास खेलायत ….बाबा के देखते सब फुद्दी जान्का भागल !

हेय रुका आब दा……….पढ़ लिख में ककरो मोन नई लागैत छई भैर दिन तास खेलत रहिया ……..ई धिया – पुता सब ……….आब दहक सबहक बाप के आई कहैत छिय साँझ में

( दालान दिस अबैत ……छूटलखीन सब पर )

चंदा मामा दूर के ,
पूरी पकाए गुर के
अपने खाए थारी में ……………!

ई कोनो नया मुहाबरा नई अछि, मुदा एकर अर्थो कुछि आब जिनगी में बांचल नई रहल ……नेना सबके बहकाब आ फुस्लाब छोईर क !
कियाक ठ्कैथ छिये बचबा के, हमरो ठकने रहा बच्चा में सब मिल क , नई – नई ई बच्चा सभके चुप करबके रामबाण इलाज छई…….., के कहलक आन्हाके आ की अनुभव अछि ….अंजाद नै अछि ठीक -ठीक
शायद दुनु भ सकैत अछि ! मुदा चंदा मामा कहिया चंद्रमा भ गेल बुझल नई अछि , शायद नमहर भ गेलोऊ हम , नई त ई वैज्ञानिक दृष्टिकोण के दोष छई …!
जहिया सँ बुझलिये जे चंदा मामा एगो गृह छै तहिया सँ रिश्ता तुइट गेल मामा भगिना के ….! चौरचन के दिन जे हृदय कोण में कनी सृधा बांचल रहैत अछि ओ उमैर अबैया ! वैज्ञानिक दृष्टिकोण के तर्क सँ
बहुत व्यक्ति के आस्था सेहो डगमगाईत देखलियेआ जिनगी में ! भौतिक ज्ञान सँ मोन में जोर -घटा चल लागैत छै ……कुछी सेष बंचला पर दौर गेलोहू मंदिर दिस नई त भैर जिनगी टाइम रहितो सबहक पास टाइम के अभाव होईछै…………! आईयो उवाह चाँद छिएक मुदा ओईइमे कोनो बुढ़िया चरखा चलबैत नजेईर नई आबीरहल अछि ! बौवा के खेल्बैत रही ….ऐना ता अनचीन्हार के कोरा में नई जायत , जावेत तक चंदा मामा के रेफेरेंस नई देबई ! चांदनी के शीतल आ शांति परिवेश में बैअस्ल रही छत पर वास्तविकता सँ दूर ……….कने दू -चाईर डेग आगा बढेने रही ……….तखने लागल जे पंछां सँ कियो टिक पकैर क झिक देलक ……..
सुनैत छिए…………नीचा आऊ (कनियाँ सोपारलक )
लागल जे कियो चंद्रलोक सँ म्र्तुलोक में बजा रहल अछि …….मोनक तराजू पर बटखरा राखी देलक कियो ….डग्म्गागेल कनी काल लेल एक्बाग.मोन !
असलियत जनला केबाद कतेक चीज सँ लोक के नाता तुइट जाई छै …..कुछी सजीव सँ कुछी निर्जीव सँ ……., कतेक ज्ञानवस् कतेक अज्ञानतावस् ………, समय पर जरूरत परला पर कमी खलई छै !
ओ ज्ञान कोण काजक जेकरा जैनों आदमी जिनगी भिअर अज्ञानी बनल रहित अछि , मोन में अंतर्धव्न्ध रहित छि भएर जीवन , सही गलत के फैसला लेब में असमर्थ रहित अछि !
सभ कहैत छै जे बच्चा के भगवान देखाई दैत छै ….किया ? हम बच्चा नई बैन सकैत छि ……..मुदा बचपना ता रैख सकैत छि…कखनो काल क अज्ञानी बनबो में बहुत बरका फायदा होई छै खाली सामंजस्य स्थापित करक कला एबाक चाही ! नहीं त समाजक दृष्टी बदैल जायत आन्हा प्रति शायद निक बुझत की ख़राब ई कही नई सकैत छि ई त दृष्टी आ व्यवहारक बात छिएक !
मुदा समय के साथ फायदा हयात ई निश्चित अछि ! समय के अनुसार चलबा में नफ्फा छैक , चंदा मामा रहैथ आ की चंद्रमा की फरक परैत छै ! छिए त एकैगो !

पुरवा बही रहल अछि चंडाल जकां सायं-सायं क रहल अछि जेना दौर रहल अछि …..आतुर भ – व्याकुल भ, हरा गेलेईया किछु ..ताकि रहल अछि जेना !

सुखा गेल मुहं , नाक , कान सबटा , पैर तरक धरा में दरार पैर गेल अछि….सौंसे खेत में , छाती फाईट क कैन रहल अछि जेना बुझा रहल छै सीता एखने गेलिहा धरती में फांक दक !

मुरी ऊपर उठेलहूँ त लागल जेना चुनरी ओढा देलक कियो मुहं पर ………!

हे भगवान् बज्जर खसौ ई करिया बदरा के सभ दिन क अपन सकल देखा क …मुहं दुईस क भाईग जाईया ! कनेक्बो दर्द नई छै कोंढ़ में बेदर्दा के ……!

आह ..हा …नाक पर एगो शीतल बूंद खसल ओढ़नी सं चुईब क …….मोनक भ्रम अछि की …..तखने दुनु पपनी पर खसल जेना कही रहल अछि उठू आब नई सताएब हम आन्ह्के किया एतेक अन्धेरेज

भेल अछि …..संतोह भेल भीतर सं कने !

ठनका ,ठनकल जोर सं तखने ……..!

कत गेलाँ गई छौरी ……..अमोट सुखाई छोऊ अंगना में उठा ले न पैन एलई…… भिज्लोऊ सबटा !

यई भौजी असगनी पर सं कपरा उतारू सबटा ……….भिजल ……..( अमोट उठबैत एगो भौजीयो के काज अरहेने गेल दुलरिया )

एक अछार बरिस क रुईक गेल त निकैल गेलहुं खेत दिस कने ………. आह हा ……..ह्रदय के गहराई तक उतैर गेल ओ सोन्ह्गर माटिक सुगंध पहिल अछारक बाद दबने छल जे बहुत दिन सं भीतर में !

मृग मरीचिका जेना भटक्लौहं कने काल ….., ओर ने कोनो छोर ओई सुगंध के ,…सैज- धैज क बैसल अछि जेना मिलन के आस में प्रेमी के बाट तकैत…

चारु दिस सुन्न परल अछि खेत नबका फसल के इंतजार में !

सरजू काका महिना भैर सं हरक शान चढ़ा रहल छैथ फार के , बरद सभ के खुवा -पिया के टनगर बनेने.निहारैत छलैथ आकाश ..सभ दिन चारू दिशा में घूम क बरखा के आष में,

लिय आई बरिस परल !

राईत भैर कतेक बरसल नई बुझी परल , मुदा निन एहन परलोहूँ जेना काल्हिये बोर्ड के परीक्षा ख़तम भेला ……!

भैर गर्मी के निन आइन्ख में घुरमैत छल !

भोरे उठी दालान पर बैस क चाह पिबैत रहि…..चन्दन बाबु कान्हा पर कोदईर नेने दौराल जाईत छलाह बाध दिस ……टोकलिएँन त इशारा में किछु कही क भैग गेला ….. आन्दीन चाहक नाम पर बिन बजेन्हो टपैक परैत छलैथ …….आई की भ्गेलैन !

हे यऊ ई चन्दन बाबु के की भ्गेलैन हाँ भोरे -भोरे …..( सरजू काका ओम्हर सब अबैत रहैथ पुछलियेंन )

हौ बौआ हुनकर खेत के पैन सबटा बहल जाईत छैन गेल्हा आईर बान्ह , ……….ओहो सुआईत.!

संझाक बेर बिदा भेलहुँ पोखैर दिस …..लागल, बेंग क अज्ञातवास ख़तम भ गेल …….टर्र.. टर्र … करैत खत्ताके ओई पार सं अई पार तक ………सुर ताल देब वाला के कमी नई , सब एकै साथै प्रतियोगिता

में ठारभेल जेना !

सबहक धानक बिया खैस परल ………लुट्कुंन बाबु के बिया बड़ जोरगर छैन ….हेतेई कोना ने बेचारा ..राईत दिन एक कक छौर आ गोबर सं खेत के पैअट देने छलखिन .! हुनकर खेतो त सभ सं पहिने गाम में रोपा जाईत छैन …!

आईयो कादो कक एलैथ हा …….झौआह में ..!

गमछा में किछ फरफरैत देख्लियेंन …..पुछलियेंन काका की अछि तौनी में ……?

होऊ खेत में बड़ माछ छल गमछा सं माँरलहुन्हा ! कालिह नीचका वाला खेत में चास दबई भेज दिहक छोटका के बड़ माछ छाई छै ..ओहू खेत में !

ठीक छै ……कहलियेंन ……!

मंगनी के माछ खा में बड़ मों लगे छै मुहं में पैन आबी गेल सुइनक !

जल्दी अबिहाँ मशाला पिस्बा क रख्बेने रह्बोऊ …………..( छोटका के जाईत – जाईत कहलिये )

फलना बाबु मईर गेला बहुत नीक लोक छलाह ……….के कहलक ……….एखने एगो धिया-पुता बजैत जाई छल जे फलना दिन भोज हेतई ….बाहर निकल्हूँ त …हरिबोल – हरिबोल सुनाई परल .!

तू ….जेबहक की नई कठियारी …..

हा हाँ कियक नई जेबै !

…..ज़ाब त संग क लेब कने –

फलना बाबु छि यु कठियारी के हकार दैत छि ………चिलना बाबु नै रहला ………!

ओहो.. ओहो …काल्हिये त गप्प भेल छल हुनका संग हमरा पोखैर पर भेटल छलाह ………आहा..हां .. कहियोऊ ……. जन्म मरण के कोनो भरोसा नई होईत छई यऊ बाबु ……….ठीके कहैत छिये काका …….!

लेकिन गेलाह सबटा सुख भोइग क बेटा-पुतौह बड़ निक छैन , खूब सेवा वारी करैत छलैन ………!

.हाँ हाँ कियाक नई कर्थिन कमिये कोण छलैन ….एगो बेटा डाक्टर छैन …एगो, वन विवाग के अधिकारी छैन ……..बेटियों सब सुखी सम्प्पन छैन ,

सब काज सं निश्चित भ क मरला हा !

हा से त सब अर्थे सं महादेव के कृपा सन भरल पुरल छैथ,……. लेकिन काज राज ढंग सं करता की नहीं तखन ने ……….भगवान् कोनो कमी नहीं देने छैन ………जवार त खुआब्क चाही ……..हा त से कियाक नई …….!

चल चल देरी भ रहल अछि ……….फेर एबाको अछि ……….पूजा पाठ करबाक अछि ……!

राम नाम सत्य है …………!

हरी बोल ….हरी बोल …….!

कथी के अतेक हल्ला भ रहल छई यऊ छोटका बाबू ……..- भौजी फलना बाबु के स्वर्वास भ गेलैन !

ठीक छई आन्हा चली जाऊ कठियारी ……. भैया के पठआ दियुं कने अंगना भोर सं भुखले प्यासल बैसल छैथ ….दालान पर !

………………………………………………………… !

एजोरियो रईत में टोर्च लक ई के आबी रहल अछि बुर्लेल आदमी होऊ

तखने मुह पर टोर्च मार्लकैन ………काका ……एकाद्सा – दुआद्सा के नोत हँकार दैत छि ……पुरख्क दफ्फा ..!

आहा …फलना बाबु …औ औ बैसू …..!

नै काका बड़ काज आछि एखन …!

हाँ आन्ह्के त एखन कजाक अंगना अछि बौआ , ……..बहिन सब एलहा की नई ?

हाँ सब आबी गेल ……काका छोटकी पुछई छल आन्ह्के बारे में ………जे काका जिब्ते छथिन ने ……….!

हह हहह हा.. हा.. हाँ हाँ ओकरा त होइते हेतई , बच्चा में बड़ मारने रहिये ने ……!

बरकी बहिन के त नन्किरबो छ ने एकटा ……

हाँ ५ सालक छई नन्किरबा ……….!

भगवान् देह समांग दोउ बढ़िया …….बड़ निक ! ठीक छई चली छि काका .!

भोजक दिन –

क्या गो तरकारी छई होऊ भाई ………?

सात गो तरकारी छाई काका ……!

कोण-कोण ?

………आलू- कोबी , भाटा -अदौरी , कदीमा , सज्मैन, साग , बड़ ,आ बड़ी ,

आह बहुत निक …….सबेर सकाळ बिझो भ जीते त ठीक रहितई ..बेसी राईत में नै ठीक होई छई …धिया पुता सब उन्घा लागे छई ……….हाँ –

जाने……. कनेक देख क आब त कत तक काज आगा बढ्ल्या …….!

तखने.दूर सं……….!

फलना बाबु छि यऊ ….बिझो करबैत छि .!

हाँ हाँ ………ठीक छई ……..!

है बिझो भेलई ….बिझो भेलई….!

है छौरी सब हल्ला नई कर ….!

बाबा ……भर्तुआ सुईत रहल …!

है जो ने उठा दही ने सांझे सा हल्ला केने छलिया भोज खाब भोज खाब …..जो जल्दी लोटा ल क आग ..!

दू गो लोटा ल लिहां…….

हाँ…!

यो एगो ओउर पात दिय ई फाटल अछि ……

है छौरी ….पात खेबा की भात …..!

जा दियोऊ बच्चा छई है ले बोउवा …दोसर पात !

है भात उठब ने ……! म तोरी गप की करैत छ उम्हर एखन धैर पतों नई परसाला ….!

दाइल लेब दाइल ..! डालना…. डालना….!

पैन ओ एगोटा त उठा ला कम सं कम ….की सब तरकारिये परसबा!..हरे करिया ..एम्हर आ ..चल पैन उठा ले तू .!

है हम पैन नै उठाब …….!

है बह्निचो पैन पिएला सन धर्म हेतो …….उठा न !

…………………

………….

है क़ात भ का हाथ धोए जाई जाऊ – है ई के धिया-पुता अछि ……..है बिचई में रास्ता पर पैन हरबे छा

…लोक पिछैर का खस्ते एकने चंडाल कही के …!

बहुत नीक ………छल काका भोज ,

जय जय भ गेलै ..!

होऊ एतबो नै कैरतई त नाक -कान कटब के छली की …एतेक सम्पैत कत क रखते ….समाज में रह के छई की नई ….!

हाँ सेहो छिये……..देखियो आब कालिह की होया ….सुन में आला जे जवार भ रहल अछि पांच गाम नोतात.!

आह करबाके चाहि .. अहि सं नाम होईत छई ….अपने नाम हेतई ने कोनो हमर थोरे ने हाँ …….गामक नाम सेहो हेतई कने !

भोजक २-४ दिन पश्चात ………..!

हाउ फलना बाबु के रईत तबियत ख़राब भ गेली की ….!

हल्ला सुनालिये काका आई भोर में ……..ओहो लटकले छैथ ……….पाकल आम छैथ

……. आब जे दिन जीबैत छैथ से दिन !

हाँ ………हमरो जेबाक छाला बंबई लेकिन ई हल्ला सुनालिये
त रुईक गेलहुं !
दू चईर दिन और रूइक जाई छि …….कही ओहो ने …आब कतबो छैथ त दियादे छैथ ने …..चली जायब त बद्नामिये हयात …..!

तहिदुआरे रुकिए जाई ……………!

(नविन ठाकुर )

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