Archive for April, 2012


हे यउ ओ छलाह मिथिला वासी

रंग अद्भुत ढंग अद्भुत

खान पानक सचार  अद्भुत

वस्त्र अद्भुत सस्त्र अद्भुत

वेद हुनकर मित्र अद्भुत

सिद्धि प्रसिद्धि छल हुनक दासी

हे यौ ओ छलाह मिथिला वासी !!

भासा के जुनी करू बखान

जिनक पसंदी पान मखान

मिथिला भूमि हुनक अभिमान

जाहिठाम सीता भेली महान

समय चक्र के देखू रासी

हे यौ ओ छलाह मिथिला वासी !

दृष्टी बदलल ज्ञान बद्लिगेल

रंग रूप और नाम बद्लिगेल

हमर मानो हुनका आपमान लागैत छैन ,

दू दिन में हुनकर शान बद्लिगेल

पोथा -पोथी के देला त्यागी

अंग्रेजी के भेला दासी

हे यौ ओ छलाह मिथिला वासी !

जागु मैथिल मिथिला वासी

वासी भ नै बनू सन्यासी

अपन रीति के ज्योति जलाबू

मिथिला के अंधकार मेटाबू

लिय संकल्प बनू अभिलाषी

ज होई सच्चा मिथिला वासी !

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आँचर –

आँचर –

चिंता के चिपरी जेना पथैत…
बेटी के संग गोटरस खेलैत …आँचर !

अपन इच्छा के रोटी बेलैत
स्वाद प्रेमक घर में परसैत …आँचर !

मतभेद के आँचर में बन्हैत
परिवार के आंगन में समटैत….आँचर !

मोनक भेद के गांठ सोझरबैत
बैन गेंदा फुल आंगन गमक्बैत…आँचर !

अपना मोन के अपने मनबैत
स्नेह्पर त्याग्क ओढ़नी फ़हरबैत…आँचर !

अनंत काल सं रिश्ता जन्म्बैत
गर्भगोदी सं ब्रम्हांड रचना करैत ….आँचर !

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