Archive for March, 2012


करेजाक छंद –

बैस्लहूँ अचेत भ प्रेमक ओश में !
आयल ने प्रीतम ने एल्हूँ होश में,
हृदय सँ आश शटल अछि एखनो;
कहियो त आबी लेता आगोश में !!

ल रिमोट के हाथ में देखू
आब बैन गेलहुं ओपरेटर
हमरे अछि भिसियार टीबी,
हमरे अछि जनरेटर !

हमरे हाथ में दुनियां अछि ,
सब हमर हाथक कठपुतली,
जिम्हर घुमेबई ओम्हरे घुम्तई
अछि हमरा हाथ में शुतली !
ओतबे चलतै, जतेक दबेबई
पैर तरक एक्सलेटर,
ल रिमोट के हाथ में देखू
आब बैन गेलहुं ओपरेटर !

कुकुर सन अध्मौगैत सब दिन
मुदा आई बनल छि ढीठ,
अन्हरा कुकुर माड़े तिरपित,
चटैत पुलौसी खीरक मीठ !
गैढ़ पढैया की आदर दैया
सब मिल कहै भप्लेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू ,
आब बैन गेलहुं ओपरेटर !

मोन भेटल अछि भरना पर
नै अपना पर अछि काबू,
हमरा सन नै काबिल कियो ,
नै हमरा लग कियो बाबु !
चढल गुमान मुहं छुटल लगाम
लिखैछी मोन के लवलेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू ,
आब बैन गेलहुं ओपरेटर !

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